Bala Kanda
बाल काण्ड
10 verses · Ramcharitmanas
Sarga 1
वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि। मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥१॥
बरनउं रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि। अकल अनादि अनूपम भजु सर्वगुन आगार॥
नाना पुरान निगमागम सम्मतं तव रघुबर बरदान। ता अनुसारि बखानिअउँ जानि अनामय गूढ़ सु
बंदउँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥ अमिय मूरिमय चूरन चारू। समन स
बंदउँ बालरूपु सुख धामा। जेहि सुर नर मुनि पूजहिं कामा॥ सिद्धि सों सुलभ सुजसु जेहि
बंदउँ सियवर पद जलजाता। जेहि निरूपम रूप गुन राता॥ निरखहिं संतत सज्जन लोगा। हरइ पा
बंदउँ सेवक सुजन सुभाऊ। राम भगति जिन्ह कें मन दाऊ॥ धूरि धरेउ सबु संतत धरनी। जा गत
बंदउँ राम सिय पद गति पाई। जिन्ह कें कृपाँ निरमल मति छाई॥ बरनउँ राम चरित सुखदाई।
जे राम भगति धरहिं उर माहीं। तिन्ह कर धर्म अर्थ काम नाहीं॥ काम धर्म अरथ जे नर भजह
जिन्ह कें राम भगति अति नीकी। तिन्ह कें सम नहिं आन अनीकी॥ राम भगति जल अगम जगि होई